लिखना शौक है मेरा।

एक शब्द के साथ लिखना शुरू करती हूँ मैं।
फिर कुछ पंक्तियों के बाद मेरी सोच खत्म हो जाती है।
पर जनाब
जब हर कहानी मुक्कमल नहीं हो सकती एक जन्म में।
तो हर कविता को एक दिन में पूरा करने का ख्याल कैसे ला सकते हो तुम अपने मन में।

आँखों की बातें

वो रास्ते में कुछ अजनबियों की आँखे जो तुमसे मिल जाती है।
आँखे जो बहुत कुछ कहना चाहती है
आँखे जो बिन कहे कुछ सीख सी दे जाती है।
कुछ दिल में खौफ जगा जाती है
तो कुछ चेहरे पर मुस्कान दे जाती है।
ये आँखे तो ज़्यादातर को दो ही मिली है
फिर क्यों इतने भिन्न भिन्न भाव झलकाती है।
हाँ पर आँखों के रंग तो अलग होते ही है
पर उन रंगों से सोच कैसे जुडी है।
ये सिर्फ़ आँखे नहीं
ये नज़र है उन आँखों की जो तुम्हे देखती है
और ये नज़रिया है तुम्हारी आँखों का भी
कि तुम उन बुरी नज़रो को भाव देखते हो बस
या अच्छी नज़र की खोज में जुटे रहते हो।

Novel_2 Turtles all the way down

Turtles all the way down

-John Green

This is a young adult fiction.

Here are some of my favourite lines from the novel and this novel is highly recommended from my side.

  • Your life is a story told about you, not one that you tell.
  • You think you are the painter, but you are the canvas.
  • The thing about a spiral is, if you follow it inward, it never actually ends. It just keeps tightening infinitely.
  • We were looking at the same sky together, which is may be more intimate than eye contact anyway.
  • We are such language based creatures that yo some extent we cannot know what we cannot name. And so we assume it isn’t real.
  • Your now is not your forever.
  • Sometimes make up feels kind of like armor.
  • As you learn science, you don’t really get answers. You just get better questions.
  • There’s a bright line between imagination and memory.
  • Love is not a tragedy or a failure, but a gift.

Beautifully written novel, a love story in which the two are separated yet the story has a happy ending.

क्या मरना ज़रूरी है?

क्या एक ज़िन्दगी को अंजाम देने के लिए मरना ज़रूरी है?
क्या नई ज़िन्दगी की शुरूआत के लिए पुरानी का मरना ज़रूरी है?
क्या सपनों के सच हो जाने पर मरना ज़रूरी है?
क्या मेरे अस्तित्व को महान बनाने के लिए मरना ज़रूरी है?
क्या ऊँचा नाम कमाने के लिए मरना ज़रूरी है?
क्या अपने कर्म सही करने के लिए मरना ज़रूरी है?
क्या तुझे मेरे प्यार का एहसास दिलाने के लिए मरना ज़रूरी है?
क्या तेरा दुलारा बनने के लिए मरना ज़रूरी है?
क्या गंगा की पवित्रता पाने के लिए मरना ज़रूरी है?
क्या आसमान में चमकने के लिए मरना ज़रूरी है?
क्या सफ़ेद रंग सा शांत होने के लिए मरना ज़रूरी है?
क्या सचमे मरना ज़रूरी है उस ऊपर वाले को
अपने सवालों का जवाब देते सुनने के लिए?
या सब जवाबों के मिल जाने पर ही वो अपने साथ ले जाएगा मुझे।

इस ज़िन्दगी में आगे बढ़ते हुए सवालो के जवाब नही मिला करते

बस मिलते है तो पहले से बेहतर सवाल।

बहाना अच्छा है मन बहलाने का …

First posted on my other blog

Prerak

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हाँ माँ याद है मुझे जो तुमने कहा था
अँधेरा होने से पहले घर आने को कहा था।
रंगीन ज़िन्दगी यूँ बेरंग हो गई
क्योंकि में दस मिनट ज़्यादा बाहर रुक गई।।
हाँ ये बहाना अच्छा है मन बहलाने का।

हाँ पापा आपकी बात कैसे मैं भूल सकती हूँ
आपने कहा था मैं अपना बचाव खुद कर सकती हूँ।
वो एक नहीं चार थे
शायद इसलिए मैं हार गई।।
हाँ ये बहाना अच्छा है मन बहलाने का।

हाँ भाई मुझे याद है जो तुमने समझाया था
अच्छी लड़किया छोटे कपड़े नहीं पहनती यही तो बतलाया था।
आज मेरा चेहरा झुलसाया है तेज़ाब से उसने
क्योंकि सलवार सूट के साथ चुन्नी ना ओढ़ी थी मैंने।।
हाँ ये बहाना अच्छा है मन बहलाने का।

हाँ याद है दीदी जो तुमने सिखाया था
अनजानों से हँसकर बात ना करू यही तो बताया था।
आज मुझे सब समझते औरत गन्दी है
क्योंकि किसी गैर का दुःख कम करने के लिए मुस्कुराई मैं।।
हाँ ये बहाना अच्छा है मन बहलाने का।

हाँ याद है वो पड़ोसियों का तुम्हे ताने सुनाना
और बस मेरे लिए तुम्हारा उन सबसे लड़ जाना।
दोष ना समाज के उन चार लोगो का था।
दोष ना समय का था ना मेरे कपड़ो का
दोषी ना मेरी मुस्कान थी ना ही मेरी शारीरिक कमज़ोरिया।
दोष ये नहीं की सड़के अँधेरी और सुनसान है।
दोष ये भी नहीं कि मैं औरत हूँ।

दोष है तो बस इतना सा है
कि
इंसान भूल गया इज़्ज़त करना इंसान की।